भारत में मुस्लिम समाज की विविधता : शिया, सुन्नी और जातिगत संरचना
भारत के अधिकांश नागरिक मुस्लिम समाज को एक समरूप इकाई के रूप में देखते हैं — परन्तु वास्तविकता इससे कहीं अधिक जटिल है। क्या आप जानते हैं कि भारत के 85% मुसलमान “पसमांदा” वर्ग से हैं, फिर भी राजनैतिक नेतृत्व मात्र 15% अशराफ वर्ग के हाथ में है? या यह कि “Naqvi”, “Rizvi”, “Kazmi” जैसे उपनाम शिया इमामों के वंश का संकेत देते हैं, जबकि “Siddiqui”, “Farooqi”, “Ansari” सुन्नी परंपरा से जुड़े हैं?
इस तथ्यात्मक विश्लेषण में जानिए — शिया-सुन्नी विभाजन का इतिहास, अशराफ-अजलाफ-अरज़ाल की तीन-स्तरीय जातिगत संरचना, पसमांदा आंदोलन की माँगें, और उपनामों व प्रथम नामों से सांप्रदायिक पहचान के संकेत — बिना किसी पूर्वाग्रह के, केवल तथ्यों के आधार पर।
एक जागरूक नागरिक के लिए आवश्यक पठन।
